विश्वास मानव मस्तिष्क का मुख्य तत्व जब से विचारों के साथ मिलाया जाता है तो अब चेतन मस्तिष्क तुरंत ही इस कंपनी को भाप लेता है और और इसे चित्र में दर्शा देता है
सकारात्मक भावनाओं में सबसे सशक्त भाग है भाव है आस्था प्रेम और सेक्स जब यह तीनों मिलते हैं तो विचारों को इस तरह से प्रभावित करते हैं कि यह तत्काल ही अवचेतन मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं जहां इन्हें अध्यात्मिक समतुल्य में बदला जाता है क्योंकि इसके क्रिया पर अनंत बुद्धि की प्रतिक्रिया होती है
आस्था एक मानसिक अवस्था है जिससे आत्म सुझाव के सिद्धांत के प्रयोग द्वारा प्रेरित या निर्मित किया जा सकता है अगर आप अपने अवचेतन मस्तिष्क को बार-बार कोई संदेश दे तो आस्था विकसित हो सकती है
उदाहरण के तौर पर आप उस उद्देश्य पर विचार करें जिसके लिए आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं जाहिर सी बात है कि इससे पढ़ने का आपका लक्ष्य इच्छा जैसी अमूर्त बाप को इसके बौद्धिक समतुल्य ईंधन में बदलने की योग्यता को हासिल करना है आत्म सुझाव और अवचेतन मस्तिष्क वाले अध्याय में कुछ निर्देश दिए गए हैं जिनका पालन करके अवचेतन मस्तिष्क को विश्वास दिलाया जा सकता है कि आपको अपनी इच्छा वस्तु मिल जाएगी आपका अवचेतन मस्तिष्क विश्वास पर काम करेगा और आपको आस्था प्रदान करेगा जिसके बाद आपके दिमाग में भी सब योजना आएंगे जिनके द्वारा आप अपनी मनचाही चीज हासिल कर सकते हैं
आस्था एक ऐसी मानसिक अवस्था है जिसे आप अपनी इच्छा से विकसित कर सकते हैं लेकिन यह तभी संभव है जब आप सभी 13 सिद्धांतों में निपुण हो और पूरी लगन से इन्हें अपने जीवन में लागू करने की चाह रखते हैं
आस्था को विकसित करने का एक बिल्कुल ही आसान सा उपाय है कि आप अपने अवचेतन दिमाग को बार-बार सकारात्मक निर्देश देते रहे चलिए अब आपको यही बात एक साधन से उदाहरण से समझाता हूं क्या आप जानते हैं कि लोग अपराधी किस तरह बनते हैं कोई व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता है कई बार परिस्थितियों परिस्थितियां ही ऐसी बन जाती है कि वह अपराध करने को मजबूर हो जाता है एक प्रसिद्ध क्रिमिनोलांजिस्ट ने इसका बहुत गहरा अध्ययन किया और बताया कि जब लोग पहली बार अपराध करते हैं तो उनके मन में खौफ पैदा हो जाता है क्योंकि अपराध करना उसका पैसा नहीं होता है इसलिए मैं इस से नफरत करने लगते हैं लेकिन अगर वे कुछ समय तक अपराध के संपर्क में रहे तो वे इससे आदी हो जाते हैं और इसे सहन करने लगते हैं अगर भी ज्यादा लंबे समय तक इसके साथ रहे तो अपराध की इस दलदल में चले जाते हैं और फिर उनका वहां से निकलना असंभव हो जाता है
जिन विचारों के पीछे प्रबल भावना होती है और जिन में आस्था होती है वे सभी विचार तत्काल ही अपने भौतिक प्रतिरूप में बदलना शुरू हो जाते हैं भाव या विचार का भावनात्मक पक्ष विचारों को जीवन और सक्रियता प्रदान करना है आस्था प्रेम और सेक्स जब भी किसी विचार के साथ जोड़ते हैं तो उसे बहुत शक्तिशाली बना देते हैं ना केवल आस्था से जुड़े हुए अपितु सकारात्मक और नकारात्मक बाप से जुड़े विचार जब अचेतन मस्तिष्क तक पहुंचते हैं तो उसे भी प्रभावित कर देते हैं
अवचेतन मस्तिष्क की प्रक्रिया करने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है यह किसी भी तरह के विचार को बहुत ही तीव्रता से भौतिक समतुल्य में बदल देता है फिर चाहे विचार सकारात्मक हो या नकारात्मक या फिर रचनात्मक अवचेतन मस्तिष्क व अद्भुत रहस्य जिसे समझ पाना प्रत्येक मनुष्य के लिए मुमकिन नहीं है करोड़ों लोगों का मानना है कि उनका जीवन गरीबी और ना कामयाबी की वजह से बर्बाद हो रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई रहस्यमई सकती उनके खिलाफ काम कर रही है और वे उसे रोक पाने में असमर्थ हैं इसी नकारात्मक विश्वास के कारण ही वे अपने दुर्भाग्य के निर्माता खुद होते हैं क्योंकि उनका निष्क्रिय दिमाग उनकी इस नकारात्मक सोच को ग्रहण कर लेता है और इसे भौतिक रूप दे देता है
अगर आप अपनी किसी इच्छा को हकीकत में बदलना चाहते हैं तो उसे अपने अवचेतन मस्तिष्क तक पहुंचा दें यदि आपकी इच्छा प्रबल और आशावादी होगी तभी आप उसे भौतिक प्रतिरूप में बदल सकते हैं वह आस्था और विश्वास द्वारा ही आपकी प्राणहीन मस्तिष्क की क्रियाओं को निर्धारित किया जाता है और आत्मासुझाव द्वारा आप अपने अवचेतन मस्तिष्क को आसानी से धोखा भी दे सकते हैं
ऐसे छल कपट को अधिक वास्तविक बनाने के लिए इस तरह से व्यवहार करें मानो वह चीज आपके पास पहले से ही है जिसकी आप इच्छा कर रहे हो और यह उस समय आपके मन में होना चाहिए जब आप अपने अवचेतन मस्तिष्क को आदेश दे रहे हो आस्था और विश्वास की स्थिति में दिए गए आदेश को निष्क्रिय मस्तिष्क से आसानी से व्यवहारिक ढ़ग से हकीकत में बदल देगा प्रयोग और अभ्यास द्वारा आप अपने अवचेतन मस्तिष्क को दिए जाने वाले किसी भी आदेश को आस्था से सराबोर करने की योग्यता हासिल कर सकते हैं केवल अभ्यास से ही आती है पढ़ने या निर्देश देने से नहीं
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